मेरठ: तब से अब तक

राष्ट्रीय राजधानी से मात्र 70 किलोमीटर दूर, गंगा और यमुना नदियों के बीच स्थित, मेरठ शहर का इतिहास सदियों पुराना है। इस शहर के इतिहास की जड़ें सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ती हैं। मध्य तथा उत्तर-मध्यकाल के दौरान कई विदेषी आक्रमणों और उनके कारण आए बड़े-छोटे परिवर्तनों से गुजरते हुए सन् 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम में इस शहर ने अहम भूमिका निभाई थी। अंग्रेज पहली बार 1803 में मराठा षासकों के साथ संधि के बाद मेरठ आए थे। 1806 यहां पहली बार छावनी स्थापित की गई थी। ईस्ट इंडिया कंपनी के षासनकाल में बढ़ते असंतोष के कारण अप्रैल 1857 के दौरान मेरठ छावनी से विद्रोह की जो पहली चिंगारियां फूटी थीं जिसने जल्दी ही पूरे देष उत्तर और पूर्वी भारत अपनी चपेट में ले लिया था। उस दौरान ‘दिल्ली चलो’ का मषहूर नारा मेरठ में ही पहली बार गूंजा था, जिसके बाद क्रांतिकारियों ने दिल्ली की ओर कूच किया था। ईस्ट इंडिया कंपनी के षासन के समय मेरठ छावनी को शहर की स्थानीय बस्तियों से दूर रखा जाता था। छावनी के हिन्दू तथा मुस्लिम सिपाहियों को जब नए कारतूस इस्तेमाल करने के लिए दिए गए तो उन्होंने धार्मिक कारणों से ऐसा करने से इनकार कर दिया था। नतीजतन, 85 सिपाहियों को बंदी बना लिया गया और इसके कुछ ही समय बाद विद्रोह देषव्यापी स्तर पर फैल गया था। दरअसल, सत्तावनी क्रांति के कारण ही पहली बार मेरठ का नाम दुनिया भर में भी गूंजा था।

पौराणिक संदर्भों में भी कई स्थानों पर मेरठ का उल्लेख आता है। कहते हैं कि इस नगर की स्थापना लंकापति रावण के ष्वसुर मय ने की थी, जिनके नाम पर इसका नाम ‘मयराष्ट्र’ रखा गया था। कालांतर में इसे ‘माई-दंत-का-खेड़ा’ और ‘माईराथ’ भी कहा जाता था। इन्हीं संज्ञाओं के आधार पर आज इसे मेरठ कहा जाता है। यह भी कहा जाता है कि मेरठ ही वह स्थान था जहां राजा दषरथ ने दुर्घटनावष श्रवण कुमार को मार डाला था। अतः रामायण की कथा का आरंभ मेरठ की भूमि से माना जाता है। वहीं सम्राट अषोक के षासनकाल के दौरान मेरठ बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण केंद्र था। पूर्व-मध्यकाल में मुस्लिम आक्रांताओं के हाथों, कई अन्य शहरों के साथ-साथ मेरठ में भी सत्तावनी क्रांति के बाद अंग्रेज सरकार की जड़ें देष में मजबूत हुईं तो उसने मेरठ में कई अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की स्थापना की क्योंकि मेरठ उस समय संयुक्त प्रांतों का सबसे महत्वपूर्ण नगर था और षिक्षित पेषों के अलावा, व्यवसाय से जुड़े लोग भी बड़ी संख्या में यहां रहते थे। आर्य समाज की ओर भी इस नगर के बाषिंदे आकृष्ट हुए थे जिसके बाद कई पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाषनों की षुरुआत हुई और अस्पृष्यता विरोधी अभियान भी यहां चले।

आज मेरठ शहर खुद मेरठ प्रखंड का सबसे बड़ा क्षेत्र है। वैसे 1836 में मेरठ को भौगोलिक तौर पर जो रूप दिया गया था, कमोबेष वह आज तक कायम है। उससे पहले 1818 में इसे सहारनपुर से अलग किया गया था और 1824 में बुलंदषहर को। इसके बाद 1836 में बेगम समरू के निधन के बाद सरधना को मेरठ से जोड़ा गया था। तब से मेरठ जिले का यही रूप है। सार्वजनिक सेवा की षुरुआत मेरठ में 1877 से हुई थी। 1914 में यहां पहली बार तीन प्रमुख संगोष्ठियां आयोजित की गई जो मेरठ राजनीतिक सम्मेलन, यूपी औद्योगिक सम्मेलन और यूपी राजनीतिक सम्मेलन थीं। तब तक मेरठ की पहचान एक प्रमुख राजनीतिक, धार्मिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर स्थापित हो चुकी थी। यह जिला कपास व्यापार और सिलाई का बड़ा केंद्र था। पास ही के एक गांव आलमगीर में हड़प्पा के अवषेष भी निकले थे। तो कहना न होगा कि मेरठ की जड़े सिंधु घाटी सभ्यता से सीधे तौर पर जुड़ती हैं।

आज का मेरठ जिला 2252 वर्ग कि.मी. के दायरे में फैला है। उत्तर से दक्षिण तक जिले की लंबाई 65 कि.मी. और चैड़ाई 85 कि.मी. है। दरअसल, मेरठ को चार हिस्सों में बांटा जा सकता है, जो हैं, 1. यमुना-हिंडन नदियों का दोआब, 2. निचला मध्यक्षेत्र, 3. पूर्वी ऊंचा क्षेत्र, 4. गंगा खादर। आज मेरठ जिले को तीन तहसीलों और बारह विकास खंडों में बांटा गया है। एक रोचक तथ्य है कि महाभारत का केंद्र हस्तिनापुर भी मेरठ के पास ही स्थित है।

गर्मी, सर्दी और बरसात मेरठ जिले के तीन प्रमुख मौसम हैं। हालांकि, बरसात के मौसम में सिंचाई को मदद मिलती है, फिर भी, इस मौसम में रोगों का प्रकोप ज्यादा दिखता है, जो क्षेत्र की जनता के स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक होता है। बेषक, मेरठ जिले और उसके आसपास की जमीन बहुत उपजाऊ है, इसलिए बरसात का मौसम खेती के लिए लाभकारी रहता है। 2005-06 के आंकड़ों के अनुसार यहां 188,042 हेक्टेयर जमीन सिंचाई योग्य थी। जनसंख्या घनत्व के मामले में उत्तर प्रदेष का स्थान देष में पहला है। बीसवीं सदी के आरंभ से ही मेरठ जिले में आबादी में निरंतर उतार-चढ़ाव देखा गया है। बीसवीं सदी के पहले कुछ दषकों में फैली महामारियों के चलते जिले की आबादी में गिरावट दर्ज की गई। बाद में कुछ क्षेत्रों के अलग होने से भी इसमें कमी आई, लेकिन खुद मेरठ के विस्तार से और 2001 की जनगणना के अनुसार प्रति वर्ग कि.मी. जनसंख्या घनत्व 1190 (कुल जनसंख्या 30,01,636) था। यह आंकड़ा 1991 (कुल जनसंख्या 34,47,912) की जनगणना की अपेक्षा कम है क्योंकि इस दौरान बागपत को मेरठ जिले से अलग कर दिया गया था।

आज मेरठ जिला मूलतः औद्योगिक क्षेत्र है। राष्ट्रीय राजधानी के निकट होने का लाभ भी मेरठ को व्यावसायिक तौर पर मिलता रहा है। यहां की उद्यमषील जनता ने मेरठ को पष्चिमी उत्तर प्रदेष के प्रमुख व्यापारिक केंद्र के तौर पर स्थापित किया है। यहां दवाओं का बड़ी संख्या में उत्पादन होता है। इसके अलावा, कपड़ा, रासायनिक उत्पाद, चीनी, बिजली उपकरण, कागज, मद्य उत्पाद, अभियांत्रिकी उपकरण, आभूषण और खेल उत्पादों के निर्माण में भी मेरठ जिले की पहचान व्यापक है। क्रिकेट खेल के उत्पादों के लिए तो मेरठ विष्व प्रसिद्ध है। इसी आधार पर मेरठ को भारत का ‘खेल नगर’ भी कहा जाता है। यही नहीं, अनेकानेक संगीत उपकरणों के निर्माण में भी मेरठ अग्रणी है। परवर्ती राज्य सरकारों ने यहां विषेष औद्योगिक क्षेत्रों के निर्माण को विषेष महत्व दिया है। परतापुर और उद्योगपुरम ऐसे ही औद्योगिक क्षेत्र हैं। जिले में करीब 60 औद्योगिक इकाइयां हैं जो छोटी और मध्यम श्रेणी इकाइयों में आती हैं। डेयरी उत्पाद भी यहां बड़ी संख्या में बनते हैं। इसके अलावा, हस्तकला से जुड़ी कई छोटी-छोटी इकाइयां भी जिले में हैं जिनमें कैंचियां, संगीत उपकरण, हथकरघा आदि का निर्माण किया जाता है।

एक और उद्योग है जिसमें मेरठ का नाम काफी जाना-पहचाना है, वह है आभूषण निर्माण। हालांकि, यह क्षेत्र अभी तक असंगठित है, लेकिन आभूषण निर्माण में मेरठ की कारीगरी प्रसिद्ध है। रिटेल और होलसेल, दोनों क्षेत्रों में आभूषण निर्माताओं और व्यापारियों की संख्या अच्छी-खासी है। असंगठित होने के कारण यह क्षेत्र हाषिये पर दिखता है, लेकिन कुछ ही प्रयासों के साथ इसमें अभूतपूर्व वृद्धि की संभावना दिखती है। इसका एक कारण यह भी है कि आभूषण निर्माण में मेरठ का नाम देष भर में चैथे स्थान पर आता है। मुंबई, राजकोट, कोलकाता और चेन्नई अन्य षहर हैं जो इस क्षेत्र में मेरठ से आगे हैं, परंतु यदि मेरठ जिले में इस उद्योग को संगठित करने के प्रयास किए जाएं तो इसमें असाधारण तरक्की की संभावनाएं निहित हैं, जिसका सीधा लाभ इस क्षेत्र के व्यापारियों को निर्माण और लाभ में, कारीगरों को रोजगार सुरक्षा और ग्राहकों को बेहतर गुणवत्ता वाले आभूषणों की प्राप्ति से मिलेगा।

मेरठ जिले में संगठित और असंगठित क्षेत्रों में कई लोगों को रोजगार भी मिला हुआ है। इसके बावजूद, जिले में बेरोजगारी की समस्या बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई ऐसे असंगठित क्षेत्र हैं जिनमें लोग काम करते हैं, लेकिन वह स्थायी रोजगार की श्रेणी में नहीं आते। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों से लोग कामकाज की तलाष में षहरों का रुख करते हैं। प्रषासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने से काफी हद तक इस समस्या का समाधान हो सकता है।

यहां के प्रषासन ने षिक्षा को भी काफी प्रोत्साहन दिया है, जिसका सीधा असर जीविकोपार्जन पर सकारात्मक तौर पर पड़ता है। प्राथमिक और उच्चषिक्षा के कई संस्थान जिले में मौजूद हैं। 2005 के एक सर्वेक्षण के अनुसार जिले में 1167 जूनियर बेसिक स्कूल, 302 सीनियर बेसिक स्कूल, 181 हायर सेकेंडरी स्कूल, 1 सरकारी डिग्री काॅलेज, 22 पी.जी. काॅलेज, 1 पोलिटेक्निक काॅलेज, 2 इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग काॅलेज, 1 टीचर्स ट्रेनिंग काॅलेज, 2 मेडिकल काॅलेज और 4 विष्वविद्यालय हैं। उच्चषिक्षा से जुड़े हुए कई मैनेजमेंट षिक्षण संस्थान भी मेरठ में खुल चुके हैं। 2005 के इसी सर्वेक्षण के अनुसार, षिक्षा संस्थानों के कारण जिले में षिक्षा दर 55.05 प्रतिषत थी, जिनमें 61.72 प्रतिषत साक्षरता दर पुरुषों की और 38.28 प्रतिषत महिलाएं साक्षर थीं। लिहाजा, यह स्पष्ट है कि महिला साक्षरता दर में वृद्धि के लिए अभी प्रषासनिक, गैर-प्रषासनिक और निजी स्तरों पर बहुत प्रयास किए जाने बाकी हैं और इन प्रयासों की अधिकांष जरूरत ग्रामीण क्षेत्रों में है।

जिला होने के कारण मेरठ का प्रषासनिक दायरा काफी विस्तृत है। मेरठ प्रखंड के अन्य जिले हैं बागपत, बुलंदषहर, गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद। यह पांचों जिले कमिषनर के प्रषासनिक दायरे में आते हैं जो इन क्षेत्रों के रख-रखाव और विकास का जिम्मेदार होता है। राजस्व मामलों के कुछ अधिकार भी कमिषनर के पास होते हैं। कमिषनर के अधीन जिलाधिकारी/कलेक्टर आते हैं जो अपने-अपने क्षेत्रों की कानून-व्यवस्था और विकास का कार्य देखते हैं।

बेषक मेरठ प्रषासन में कई अन्य विभाग भी हैं जिनका काम अपने-अपने कार्यक्षेत्र का विकास और मेरठ जिले के समग्र विकास में योगदान देना है। कृषि विभाग, पषुपालन, उद्योग, वन विभाग, षिक्षा, सूचना और सहकारिता क्षेत्र के विभागों का काम स्थानीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं आयकर विभाग, सीमा षुल्क और केंद्रीय राजस्व, दूरभाष, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), रेलवे जैसे सरकारी विभाग भी हैं जो व्यापक स्तर पर अपना काम कर रहे हैं। विद्युत विभाग, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल सुविधा और बैंक तथा अन्य वित्तीय संस्थानों में भी मेरठ जिला सुविधा संपन्न है।

मेरठ की कई हस्तियों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान स्थापित की है। मनोरंजन, खेल, राजनीति, कला एवं संगीत जैसे क्षेत्रों में वह अपनी अभूतपूर्व पहचान कायम करने में सफल रहे हैं। इतिहास हो या वर्तमान, भारत के नक्षे पर सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण बिंदू पर स्थित होने के कारण मेरठ निरंतर परिवर्तनों और उपलब्धियों का साक्षी रहा है और इस क्षेत्र के व्यावसायिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व में प्रतिदिन श्रीवृद्धि हो रही है।