पशुधन से ही संभव है किसानों की दोगुनी आय

भारत में पशुओं की संख्या बहुत अधिक है और भारत का आधार खेतीबाड़ी करने वाले किसानों और पशुपालकों के हाथ में है। जो सीमित साधन होते हुए भी देश का पालन करते है। आजादी के बाद से कृषि अनुसंधानों ने निरंतर किसानों की हालत सुधारते हुए उनकी उत्पादन क्षमता को बढाया है। फसलों की नयी किस्में हो या पशुओं की नयी नस्लें अनुसंधान के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने समय- समय पर देश को उपयोगी  वातावरण और रास्ते प्रदान किये है। दूसरी बात ये भी है कि देश का किसान प्रोफेशनल नही है उसे बहुत -सी तकनीकों और नयी खोजों की सही समय पर जानकारी नहीं मिल पाती जिससे वे परम्परागत कृषि प्रणाली में लगे रहते है और उचित लाभ नही कमा पाते।युवा कृषि को प्रोफेशन नहीं समझते इसलिए इसमें अवसर होते हुए भी वे किसी संकोच से इसे प्रोफेशनल करियर की तरह नही ले पा रहे है।ग्रामीणों के बीच ऐसी मानसिकता बनी हुयी है कि वे अपने बच्चों को किसान बनता नही देखना चाहते,उनके लिए करियर के मायने अधिकारी,अफसर,इंजिनियर और डाक्टर आदि बनना ही है। ये एक सामाजिक सोच की परम्परा है। हालांकि इन सबके बीच ऐसे साहसी युवा भी सामने आते रहते है जो आईआईटी किये हुए है, वैज्ञानिक है और उच्च नौकरी छोड़कर वैज्ञानिक विधियों द्वारा गाँवों में खेती कर रहे है और उन्नति का शानदार उदाहरण बने हुए है।

आज जब हमारे प्रधानमंत्री मोदीजी ने किसानों की आय दोगुना करने का संकल्प लिया हुआ है तो देश के विभिन्न वैज्ञानिक उपयोगी तकनीकों और नयी कृषि विधियों को किसानों की आय बढाने के साधन बनाना चाहते है। केन्द्रीय गोवंश अनुसंधान में राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य केन्द्र किसानों की दोगुनी आय करना है। जिसमें देश के प्रमुख वैज्ञानिकों ने अपने शोधों पर आधारित सुझाव और विचार प्रकट किये। एक्सडीडीटी के महानिदेशक डा. एस.मदान ने इस विषय में कहा है कि पशुधन के द्वारा ही किसानों की आय दोगुनी की जा सकती है। पशुवंश  सुधार से निरंतर नयी नस्लों की गाय विकसित की जा रही है। गोवंश अनुसंधान संस्थान में पैदा की गयी फ्रीजवाल गाय को उन्होंने वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि बताया है।जिसका लाभ भारत में बड़े-बड़े डेयरी फार्मों, किसानों, भूमिहीन किसानों को मिलना आवश्यक है। आगे उन्होंने भारत के पशुओं और अन्य देशों के पशुओं के चारे में पायी गयी विविधता पर भी बात की और भारत के सामान्य पशुपोषण पर आश्चर्य करते इसे ज्यादा उपयोगी और शक्तिवर्धक बताया है। उन्होंने आगे कहा कि भूमिहीन छोटे किसान  पशुधन के वास्तविक संरक्षक है आज उन तक भी जागरूकता की आवश्यकता है। किसानों को परम्परागत कृषि प्रणाली के साथ आधुनिक तकनीकों को भी बखूबी प्रयोग करना आवश्यक है।

समारोह के चीफगेस्ट भारतीय कृषि अनुसंधान के महानिदेशक और  DARI के सचिव डा.त्रिलोचन महापात्रा ने कहा कि-कृषि अनुसंधान परिषद 90 वर्षो से देश के लिए समर्पित है और देश को कठिन दौर से निकालने पर सदैव तैयार रहा है।नयी तकनीकी और अनुसंधान से निरंतर देश को उन्नत बीज, फसले, दवाईयाँ और पशुओं की नयी नस्लें प्रदान की है ।दोगुनी आय करने के उन्होंने किसानों को वैज्ञानिकों से जुड़ने का सुझाव दिया और आपस में मिलजुलकर काम करने को कहा ।उन्होंने किसानों को एकता की चैन बनाने का सुझाव दिया जिससे जानकारी का विस्तार हो सके।किसानों के बीच नयी तकनीकें और अनुसंधान शीघ्रता से नहीं पहुँच पा रहे है जिसके लिए राज्यों की सरकारों को इस ओर ध्यान देने को कहा है । भारतीय कृषि अनुसंधान संंस्थान ने सूचनाओं में तेजी लाने के लिए जो उपयोगी के समाधान किये है उसके विषय में  भी जानकारी दी ।उन्होंने कहा किसान बहुफसलें, बागवानी और पशुपालन करके अपनी आय को बढ़ा सकते है  ।उन्होंने बिजनेस प्लान की व्यवस्था पर जोर दिया ,जिसमें युवाओं को आगे आकर चुनौती स्वीकारने को कहा है ।साथ ही उन्होंने चारे की नयी किस्मों, पशुओं को बिमारी से बचाने के प्रोग्राम और न्यूट्रिनो सप्लीमेंट्री की आवश्यकता पर चर्चा की। । देश के उत्पादों का बाजार व्यापक ना होने से उन्होंने उत्पादन बढने से मूल्य में आ रही कमी को सटीकता से समझाया।

इस राष्ट्रीय सम्मेलन में किसानों को आय बढाने के लिए के उपयोगी मार्गदर्शन दिये गये। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने किसानों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए संसाधनों द्वारा समस्याओं को किस तरह सुलझाया जा सकता है इसपर सुझाव दिये तथा कृषि और पशुपालन से उत्पादन बढाकर आय दोगुनी करने के उपाय बताये। इस राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता डा.जे.के मित्तल ने की। एच.रहमान क्षेत्रीय प्रतिनिधि अंतराष्ट्रीय पशुधन संस्थान दक्षिण एशिया, और डा.आरके मित्तल सरदार बल्लभभाई पटेल कृषि विवि के कुलपति, डा.जेके जैना उप महानिदेशक पशु विज्ञान नयी दिल्ली आदि उपस्थित रहे।